हैं इनायतें कितनी तेरी

हैं इनायतें कितनी तेरी  मैं हक़दार नहीं प्यारे
नहीं प्यास मुझको तेरी देखो मैं तलबगार नहीं प्यारे

नज़र ए कर्म मुझ पर इतना मेरी सरकार आज करना
खाली है आँखें मेरी इनको अश्कों से तुम भरना
मुझको अपनी मोहबत का इतबार नहीं प्यारे
हैं इनायतें कितनी तेरी मैं हक़दार नहीं प्यारे
नहीं प्यास मुझको तेरी देखो मैं तलबगार नहीं प्यारे

मुझे अपने दर्द दे दो कुछ ऐसी तलब लगाना
हँसते ही ये दम निकले कितने सितम करे ज़माना
मैं तेरी रहमतों का शुक्रगुज़ार नहीं प्यारे
हैं इनायतें कितनी तेरी मैं हक़दार नहीं प्यारे
नहीं प्यास मुझको तेरी देखो मैं तलबगार नहीं प्यारे

इन आँखों को बरसता पल पल का सावन देना
जिसमें हो प्यास तेरी बस ऐसा जीवन देना
बस बढ़ती तड़प देना संसार नहीं प्यारे

हैं इनायतें कितनी तेरी मैं हक़दार नहीं प्यारे
नहीं प्यास मुझको तेरी देखो मैं तलबगार नहीं प्यारे

इस दिल को इश्क़ की कुछ ऐसी तलब लगाना
पल पल रहे सिसकता रहे फिर मुस्कुराना
दुनिया में रहा उलझा तेरी दरकार नहीं प्यारे
हैं इनायतें कितनी तेरी मैं हक़दार नहीं प्यारे
नहीं प्यास मुझको तेरी देखो मैं तलबगार नहीं प्यारे

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