हरिहौं ऐसी दशा हमारी लिख लिख कागद कारौ भयौ मन पहले कारौ भारी बाँवरी मूक ही रह्यौ अबहुँ इतनो ही बुद्धि बिचारी बहुत कियो ढोंग आडम्बर बाँवरी भई घोर अहंकारी नाम भजन सौं दूर रहै मूढ़े रहि जन्मन मति मारी
अपनी प्रिय स्वामिनी जु प्यारी जु श्रीराधा जु को उनकी सखी कहती है प्यारी जु मोय क्या स्वप्न आय रह्यो। प्यारी जु सखी के मुख की ओर देखने लगती है और उत्सुक हो जाती है कि सखी के हृ...
2 हे स्वामिनी जू ! मुझ अधम पर कृपा करो। मेरामन इस संसार के विषय विकार से हटा दो लाडली जू। मुझे आपके चरणों का अनुराग प्राप्त हो जावे। आपका नाम ही मेरा धन हो जाये किशोरी जू । जानती...
श्यामसुंदर का वेणु वादन ******************** प्रियतम ने वेणु नाद छेड़ दिया है, जैसे ही यह प्यारी जु के कर्णपुटों को स्पर्श हुआ हृदय में प्रेम तरंग हिलोरे लेने लगी। श्री प्रिया एकदम व्याकुल ह...
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