गर शौक है

गर शौक है हुस्न ओ इश्क़ का सच्चा
तेरी तलाश मुक्कमल होनी हैं वहां
चल इन महफिलों से रुख कर ले अब उधर
सुकून ए रूह तुझे तेरा मिलेगा जहां

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