साँची प्रीत की रीति

साँचो प्रीति की रीति देयो नाथा

बाँवरी जानै न रीति भजन की पकरौ भुज देयो साथा

तुमहिं ठौर होवो मेरौ साँची काहे भटकूँ बनत अनाथा

नाम भजन जिव्हा रहै सदा गाऊँ तिहारी गुण गाथा

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