उनको तो निभानी आती है आशिकी हर हद से परे ही
अपनी ही जुबान न कभी उलाहने से थकती है
वो तो खड़े हैं सदा से राह ए मोहबत में यूँ सजकर
हमारी ही नीयत उन राहों में मुड़ जाने से थकती है
अपनी प्रिय स्वामिनी जु प्यारी जु श्रीराधा जु को उनकी सखी कहती है प्यारी जु मोय क्या स्वप्न आय रह्यो। प्यारी जु सखी के मुख की ओर देखने लगती है और उत्सुक हो जाती है कि सखी के हृ...
2 हे स्वामिनी जू ! मुझ अधम पर कृपा करो। मेरामन इस संसार के विषय विकार से हटा दो लाडली जू। मुझे आपके चरणों का अनुराग प्राप्त हो जावे। आपका नाम ही मेरा धन हो जाये किशोरी जू । जानती...
श्यामसुंदर का वेणु वादन ******************** प्रियतम ने वेणु नाद छेड़ दिया है, जैसे ही यह प्यारी जु के कर्णपुटों को स्पर्श हुआ हृदय में प्रेम तरंग हिलोरे लेने लगी। श्री प्रिया एकदम व्याकुल ह...
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