वृन्दावन वास

कबहुँ मिलिहौं श्रीवृन्दावन वास
रसिकन सँग मिले निशिबासर निरखत युगल विलास
कबहुँ छटै तिमिर हिय कौ गाढ़ो होय ललित प्रकास
कल्मष हिय कै कबहुँ धुलि जावैं कबहुँ गौरश्याम करैं वास
सकल वासना जगति कौ छूटें कबहुँ प्रपन्च कौ नास
बल न राखै कोऊ निर्बल बाँवरी बस कृपा कोर की आस

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