बिन तुम्हारे कहो
बिन तुम्हारे कहो दिल के अरमान सम्भालें कैसे
दिल सम्भाले न सम्भले कहो सम्भालें कैसे
जाने क्या खलबली सी मची है रूह तलक हमारी
जान तक निकल रही अब सम्भालें कैसे
सच है बहुत मुश्किल है राह ए मोहबत
उठते न कदम अब कहो चला लें कैसे
कौन गिनेगा तुम बिन यह रुकती धड़कनें हमारी
अब खुद को इन तूफानों से बचा लें कैसे
अश्क़ अब एक न निकला रूह तलक जलती है
ख़ामोश होती धड़कनों को अब उछालें कैसे
ज़ायक़ा मिलने लगा है अब इस सुलगन का हमको
दिल अपना इस आग से अब हटा लें कैसे
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