छोड़ दिए वेद शास्त्र
छोड़ दिये वेद शास्त्र सकल तेरौ ही आधार
गौर निताई नाम भजूँ मैं नित रहूँ गौर चरणार
एकहुँ नाम भजै ते होवै भव बन्धन सों निस्तार
महावदान्य गौर निमाई हिय सों अति उदार
पात्र कुपात्र कोऊ न देख्यो दियो प्रेमरस धार
हा हा गौर निताई नाथा बाँवरी रह्यो पुकार
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