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जिव्हा को हरिनाम

हरिहौं जिव्हा कौ धन देयो हरिनाम नयनन सौं निरखुँ छब निसदिन हिय बसों सुखधाम कर सौं सेवा करूँ भक्तन की चरणन आऊँ धाम चित्त लगै बस ध्यान तिहारे भजन होय निष्काम भोग विषय धन लालसा ...

गुरु चरण विनय

**श्रीगुरु गौरांगो जयते** प्रथम प्रणाम श्रीगुरु चरण जिन दियो नाम कौ ज्ञान बिन नाम हरिभजन बिन बाँवरी जीवन पशु समान श्रीगुरु ज्ञान दियो साँचो तू होय आनन्द कौ मूल साँची सेवा जब...

हिय कपटी

हरिहौं हिय कपटी अति घोर लोभ मद मत्सर लालसा आदि हिय बैठे रहै चोर कपट कौ मेरौ सुभाव जन्मन सौं पाई न कोऊ ठौर हरिनाम सौं रहै कँगाल बाँवरी फिरै माया ही चहुँ ओर कोऊ विधि सौं बात बनै ...

भजन हीना

हरिहौं भजनहीना मेरौ सुभाव कबहुँ बात बनै भजन की साँची हिय न उपजै चाव रसिक जना की बातां सुने न बाँवरी राखै दूर दुराव कोऊ विध उपजै हिय भक्ति कोऊ विध उपजै भाव कबहुँ हिय लगै हरिन...

कौन समय

हरिहौं कौन समय तुझे ध्याया बचपन खेलत समय गयो सगरौ, खावत पीवत बिताया शिक्षा लीन्हीं सब माया की, बड़ी बड़ी पोथी बाँची धन की बेलि रही फिर बाढ़ै ,न होय कमाई साँची अबहुँ लग्यो हाय मैं ...

जन्म जन्म सौं सोई

जन्म जन्म सौं सोई हरिहौं कबहुँ निद्रा नसावै कबहुँ साँचो धन की तृषा उदय होय कबहुँ हिय ललचावै कबहुँ लोभ जगति कौ छूटे कबहुँ रसिक चरण सहरावै कबहुँ ब्रजरज धार भाल पर श्यामाश्य...

प्रेम भक्ति के स्वाद को

प्रेम भक्ति के स्वाद कौ बिरला पावै कोय रसिक आश्रय कृपा बनै सुखी  होय रहै दोय नित्य निरतंर नाम वाणी देवै साँचो स्वाद हिय युगल रस भीजत रहै होय परम उन्माद कृपा बनै श्रीयुगल की ...