Posts

क्षण क्षण बिरथा कीन्हीं

हरिहौं क्षण क्षण बिरथा कीन्हीं चँचल चित्त इत उत दौराय बिरथा स्वासा कीन्हीं हरिहौं हरो मन कौ चंचलता अपने चरणन लावो पुनि पुनि दौरे जग वीथिन अपनी शरण बैठावो हरिहौं बाँवरी अ...

अवगुण की खान

हरिहौं होऊँ अवगुण कौ खान जेई विध करौ चरणन राखो हरिहौं अपनो जान गुण सकल तिहारो नाथा बाँवरी होय अवगुण ढेरी जन्म जन्म गमाई मूढ़ा अबहुँ छूटै नाँहिं मेरी मेरी जेई विध तुम चाहो हर...

इश्क़ की गलियों में

भूल जाएं वजूद अपना तेरे इश्क़ की गलियों में यही आँखें देखे सपना तेरे इश्क़ की गलियों में तेरे इश्क़ की बस्ती साहिब बड़ी दूर बस रही है बड़ा मुश्किल हुआ चलना तेरे इश्क़ की गलियों मे...

अवगुण की खान

हरिहौं होऊँ अवगुण कौ खान जेई विध करौ चरणन राखो हरिहौं अपनो जान गुण सकल तिहारो नाथा बाँवरी होय अवगुण ढेरी जन्म जन्म गमाई मूढ़ा अबहुँ छूटै नाँहिं मेरी मेरी जेई विध तुम चाहो ह...

लौटे हैं

एक और तूफ़ान दिल मे दबा कर लौटे हैं मरे हुए तो मुद्दत से थे लाश उठाकर लौटे हैं खेली है होली हमने अपने ज़िगर के लहू से ही बेरंग सी ज़िन्दगी को एक रँग रँगाकर लौटे हैं जाने क्यों मुझम...

लीला6

*श्रीगौर लीला रस तरंगिणी*           6 *गौरसुन्दर का शयन*       गौरहरि एक बड़े पलँग पर शयन कर रहे हैं। स्वामिनी बिष्णुप्रिया जी उनके कक्ष में विराजमान हैं।संध्या अभी हुई नहीं है...

बाँवरी कन्टक

हरिहौं बाँवरी कन्टक सम होरी कौन भाँति प्रभु सन्मुख आऊँ लाजत करूँ निहोरी लाजत करूँ निहोरी नाथा भोग विषयन के कांटे दिन दिन बढ़त दून सवाया हरिभजन सौं न छाँटे कौन भाँति सन्मुख ...