हे रससिन्धु

हे रससिन्धु कीजै दयाबिन्दु, तुमसौं कौन उदार।
हे स्वामिनी ललितभामिनी, तुम्हीं करौ सम्भार।।
ललिते ललिते ललिते गाऊँ जितने पाऊँ स्वासा।
तुम्हरी कृपा तुम्हरी करुणा, राखौं चरणन पासा।।
ललित रङ्ग दीजौ छिटकाय , कीजौ आपन चेरी।
ललिते ललिते ललिते ललिते, बाँवरी दासी तेरी।।

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