हे हरि Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps November 17, 2021 हे हरि हिय न भजन कौ प्यासजगत दिखावा बन्यौ घनेरो परी माया की फासनाम न निकसै एक क्षण साँचो झूठ जगत कौ रासबाँवरी मूढ़े नींद परी गहरी बिरथा कीन्ही स्वास Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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