Posts

कैसी मेरी बसन्त

*कैसी मेरी बसन्त प्रियतम* कैसी मेरी बसन्त प्रियतम इस पीत लौ के पीत प्रकाश में दृग बहाती मैं पीत भई कैसी मेरी बसन्त प्रियतम इस दग्ध हृदय के ताप को कैसे शीत करे पीत चन्दन कैसी मेरी बसन्त प्रियतम हृदय कुँज में कोई झंकार नहीं नहीं हुआ पीत श्रृंगार प्रियतम कैसी मेरी बसन्त प्रियतम तुम ही तुम पीत श्रृंगार मेरा  बस तुमको ढूँढ़ रही प्रियतम कैसी मेरी बसन्त प्रियतम हिय कुँज में तिमिर घना कबसे बन पीत प्रकाश बसो प्रियतम कैसी मेरी बसन्त प्रियतम कैसी मेरी बसन्त प्रियतम

तू ही बता

*तू ही बता* न तेरा पता पाया न समझा कुछ इशारा आँखों से अब बहता है बस पानी खारा खारा तू ही बता दे किस तरह दिल को मैं सम्भालूँ नहीं मुझसे सम्भलता अब बेताब है दुबारा किसको बताएँ हाल ए दिल कौन जाने बात क्या बस दर्द वही जाने जिसे इश्क़ ने हो मारा मीठी है यह जलन भी भरे कई तूफान भीतर तेरा नाम लेकर रोये बिन होता नहीं गुज़ारा हाय बड़ा मीठा मीठा दर्द है करते रहो इज़ाफ़ा इसका नशा भी साहिब लगता है मुझको प्यारा तेरे इश्क़ ने उठाये हैं तूफ़ान दिल में भारी है उतनी ही लज़्ज़त इसमें जितना है दर्द करारा आज डूबा दो मुझको साहिब इस इश्क़ के समंदर में नहीं लौटना मुझको वापिस नहीं देखना किनारा

क्यों है

*क्यों है* तुमसे दूर रहकर जीने की चाहत क्यों है ? हमको सदा से बेवफ़ा होने की आदत क्यों है ? नहीं आता इश्क़ हमको यह सच है जानते हैं फिर भी तुमको मुझसे इश्क़ की चाहत क्यों है ? है वीरान दिल यह मेरा फैला दूर तक अंधेरा बस इक तेरे नाम से ही इस दिल को राहत क्यों है ? भीतर कुछ पिघलता है आँखों से जो बहता है इस मीठी सी जलन से इस दिल को राहत क्यों है ? सच हमसे इश्क़ करके कुछ न मिलेगा साहिब पर तेरा इश्क़ ही साहिब सच्ची इबादत क्यों है ? तुमको किया है रुसवा मुद्दत से हमने ऐसे नस नस में बेवफ़ाई मेरे हाय ऐसी फितरत क्यों है ? क्यों दिल यह जल रहा है तेरा नाम लेकर बेताब सी इन साँसों को चलने की आदत क्यों है ?

कीन्ही ठगोरी

हरिहौं कीन्हीं बड़ी ठगोरी नाम धन कछु संचय न कीन्हीं ढोंग बढ़ावत जोरी कान दिये न सन्तन की बातां बाँवरी जगति दोरी नाम भजन की रीति बिसारी भाव भजन सौं कोरी कबहुँ छुटे दम्भ हिय कौ पतित बाँवरी करै निहोरी हमरो कोऊ बल नाँहिं नाथा तुमहिं किये सब होरी

रे मन हिय धर

रे मन हिय धर श्रीयुगल चरणकमल क्षण क्षण सुमिरै क्षणहुँ न बिसरै यहि सम्पति विपुल सेवत सुख पावत निशिबासर यहि प्रेम कौ फल श्रीयुगल चरण हिय धरै बाँवरी होवत मन निर्मल सकल वासना हिय की छुटै मिलत नाम कौ बल यहि अरजा करै गुरु चरण कमल सौं नासै घन तिमिर सकल

हाल ए दिल

खँजर चला के पूछते हैं क्या है हाल ए दिल मेरा खुद ही गवाही देगा दिल क्या है हाल ए दिल मेरा आँखे ही बोली आँखों से लफ़्ज़ों के दायरे सिमटे फिर अश्क़ कहने दौड़ चले क्या है हाल ए दिल मेरा बस वही इक मुलाकात ही पकड़ रही पल पल हमें जाने यह कैसा दौर है क्या है हाल ए दिल मेरा उस एक पल को छूने को सब पल मेरे सिमट रहे वो तू या कोई और था क्या है हाल ए दिल मेरा खामोश था सब एक दम कोई लहर उठी न थी मैं खुद ही खुद से पूछती क्या है हाल ए दिल मेरा जाने यह क्या तूफ़ान है बस जा रही अब जान है पल पल है दिल पुकारता यही है हाल ए दिल मेरा आँखों मे है वही अदा वही शोखियाँ हैं खिल रहीं साँसे भी रुक रही हैं अब जाने क्यों तुझसे मिल रहीं वो पल ही था कुछ मय भरा जो होश सब उड़ा गया दिल ही गवाही देगा बस क्या है हाल ए दिल मेरा

जनमोत्सव बधाई

*श्रीस्वामिनी जन्मोत्सव बधाई* *********************** गौरवामांगिनी करुणामयी श्रीस्वामिनी  नबद्वीप विलासिनी श्रीविष्णुप्रिया नामिनी श्रीनबद्वीप नित्य केलि नित्य नव नव विलास श्रीगौर आंदिनी वाम अंगे करै निवास मृदुला सरोजिनी गौरांगी गौर प्रेम प्रदायिनी गौर प्रेम रसिकनी अति कोमल सुभायनी नित्य नव नव विलास श्रीयुगल नबद्वीप धाम प्रेम अवतार गौर प्रेम स्वरूपिणी विष्णुप्रिया भाम मङ्गल मङ्गल बधाई मङ्गल मङ्गल नृत्य गान नबद्वीप श्रीयुगल सब नागरी हृदय मान नव नव श्रृंगार झूम नव नव हिय उल्लास  नदिया युगल विलसत नित्य हिय कुँज करै रास वीणा अरु मृदङ्ग बाजै मधुर मधुर नाम गान बाँवरी यहि विनती करै राखो निज दासी जान  श्रीयुगल नाम जिव्हा रटै श्रीयुगल केलि नित बाँवरी दासी सेवा करै क्षणहुँ न बिसरै चित्त जय जय नबद्वीप धाम जय जय विष्णुप्रिया गौर दासी कबहुँ चरण राखो दुई करि जोरि करै निहोर