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रुनझुन घुँघरू

रुनझुन रुनझुन घुंघरू बाजत नाचत गौरा राय रे साथ नित्यानन्द प्रभु गदाधर मिलि हरि हरि गाय रे परम् प्रेम बांटत अयाचत सहज करुण सुभाय रे हरि हरि बोले नाचे नाचे गौर दुहुँ भुज उठाय रे भई प्रसन्न विरहणी बाँवरी देख देख हर्षाय रे पुलक पुलक हँसे लेत बलैयां प्रिया मृदु मुस्काय रे

काची हमारी डोरी

हरिहौं काची हमरी डोरी कौन विध बांधे बाँवरी बलहीना सुनियो अरजा मोरी तुम्हरी डोरी पाकी नाथा तुमहिं बाँधो आपहुँ पकरि हमरो बल न कछु होय नाथा तुमहिं राखो जकरि तुम्हरौ पकरन हमहुँ नाय भाजै कोटि खीँचे माया हमरो दौर तुम्हरे चरणन हरि दीजौ चरणन छाया

देयो नाम कौ धन

हरिहौं देयो नाम कौ धन पतित भिखारिन जन्म जन्म सौं बिना नाम निर्धन नाम की पूँजी साँची नाथा कबहुँ बाँवरी चित्त लाय कूकरी भोगी जन्म जन्म सौं जगति विष्ठा पाय हा हा नाथा आपहुँ राखो पकरि पकरि इक बेर नासै ताप जन्म जन्म कौ मिट जावै सकल अंधेर

मन भजन चोर

हरिहौं यह मन भजन कौ चोर भोग पदार्थ नीके लागे बाँवरी जगति राखै दोर जगति राखै दोर बाँवरी कछु सुने न सन्तन बात बिरथा कीन्हीं स्वासा मूढ़ा जीवन अनमोल गमात कौन भाँति दसा सुधरै न हरि गुरु चरण मन लाय ढोंगी पाखण्डी घोर प्रपंची रही झूठो स्वांग बनाय

बाँवरी न भजन सुहाय

हरिहौं कबहुँ बाँवरी भजन सुहाय विष्ठा कीट जन्म जन्म सौं भोग विषयन भाय जगति पदारथ रुचि राखै न करे भजन की बात  सन्त चरण रज न सुहावै मूढ़ा भोग विषय लपटात हरिहौं आपहुँ देयो चपत एक भव निद्रा छुट जाय धिक धिक ऐसा जीवन बाँवरी स्वासा रहै गमाय

पाथर हिय

हरिहौं पाथर हिय कठोर कबहुँ नाम लेय द्रवै चित्त होय प्रेम रस भोर कबहुँ नाम सौं प्रीति उपजै कबहुँ नाम रस पावै छांड भोग विषयन बाँवरी नाम हरि कौ गावै हा हा नाथ भई दुर्गति बिन नाम भजन कंगाल उठ री बाँवरी भव निद्रा सौं छांड जगति जंजाल

हिय ताप बढ़ै

हरिहौं कबहुँ हिय ताप बढ़ै निहार मुख दर्पण माहिं बाँवरी कबहुँ भूमि गढै कबहुँ उतरै मलिन हिय सौं जन्म जन्म कौ धूर कबहुँ हिय नाम उपजै साँचो फिरै विषयन मद चूर हरिहौं आपहुँ लेयो बचाय नाँहिं बाँवरी कोऊ ठौर नयनन नीर कबहुँ बहाय बाँवरी भजै निताई गौर