प्रेम अकारण है कोई कारण नहीं कारण हुआ तो वह प्रेम नहीं प्रेम तो एक उछाल है बस एक तरँग सी बह गई छू गयी निकली कहीं से पिघलाती सी कहीं जाने को व्याकुल आखिर कहां?? प्रेम तक ही प्रेम क...
भीगी सी पलकों से तेरा इंतज़ार करते हैं जाने क्यों इतना बेकरार हमको सरकार करते हैं नहीं सम्भलते यह तूफान ए इश्क़ हमसे सम्भाल लो तुमसे यही दरकार करते हैं मुद्दतें गुज़ार दी हमन...
एक बार कान्हा जू का प्यारा सखा मधुमंगल उनसे रुष्ट हो जाता है। उनसे कहता है कान्हा तुम सब सखाओं से प्रेम करते हो और उनको सब मिष्ठान खिला देते हो। मेरा तो तुम ध्यान ही नहीं रखत...
यह ज़िन्दगी भी कम है तुम्हें पुकारने को पुकारने का भी स्वाद कहाँ आया इस रूह को न छुड़वाओ अब मै मयखाना अपने नाम का तेरा नाम ही मुझे अजब नशेमान करता है जाने क्या मय सी पी ली तुझे पु...
तुम्हारी ही रस तरंगों में झूमती गिरती पड़ती कभी तुमहीं में समा जाती तो किसी क्षण विरह की अग्नि दग्ध करने लगती मुझे इस प्रेम वारिधि के तट पर बैठी एक छोटी सी बून्द तुममें ही सम...